Census Night 2027: 1 March Ki Raat Ginti Rules | DataDigest
भारत में पहली बार आयोजित हो रही पूर्णतः डिजिटल जनगणना 2027 में 28 फरवरी और 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) को "Census Night" घोषित किया जाएगा। 2027 की जनगणना का यह सबसे Important नियम है।
यह एक ऐसा नियम है जिसके तहत देश के उन लोगों को गिना जाता है जिनका कोई स्थायी घर नहीं है। साथ ही यह पूरी जनगणना का Reference Point भी है। आइए 10 सेकंड में समझते हैं।
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👉 अभी फॉलो करें (Follow Now)1. Census Night क्या है? 10 सेकंड में समझें
परिभाषा: जनगणना की पूरी अवधि के दौरान तय की गई एक विशेष रात को Census Night कहा जाता है। 2027 में यह 28 फरवरी और 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) होगी।
मुख्य उद्देश्य: "कोई भी नागरिक छूटना नहीं चाहिए।" इस रात प्रगणक सड़कों, फुटपाथों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर जाकर बिना घर वाले लोगों की Live गिनती करते हैं।
समय: बेघर आबादी की गिनती रात 10:00 बजे से सुबह 4:00 बजे तक लगातार चलती है।
नोडल मंत्रालय: गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त (RGI)।
2. Census Night पर किन लोगों की गिनती होती है?
इस विशेष रात को प्रगणक HLO Mobile App (Houselisting and Housing Census App) लेकर फील्ड में निकलते हैं और केवल उन्हीं लोगों का डेटा दर्ज करते हैं जो खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं:
- फुटपाथ और फ्लाईओवर: सड़कों के किनारे या पुलों के नीचे सोने वाले लोग।
- यात्री (Transit Population): रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनल्स और एयरपोर्ट पर रात बिताने वाले मुसाफिर। शर्त यह है कि उन्हें उनके मूल गांव/घर पर न गिना गया हो।
- आश्रय स्थल (Night Shelters): रैन बसेरों, अनाथालयों, वृद्धाश्रमों और धार्मिक स्थलों में रात गुजारने वाले बेघर लोग।
- कामकाजी लोग: रात की शिफ्ट में खुले में काम करने वाले मजदूर, ठेले वाले या कुली।
- Hospital + Jail: 1 मार्च की रात जो मरीज भर्ती है या कैदी जेल में है, वो Institutional Household में गिना जाएगा।
3. प्रगणकों (Enumerators) के लिए 4 कड़े सरकारी नियम
डिजिटल जनगणना 2027 के तहत CMMS Portal (Census Management & Monitoring System) और HLO App की गाइडलाइंस के अनुसार इन 4 नियमों का पालन अनिवार्य है:
1. जियो-फेंसिंग और लोकेशन (Geofencing):
प्रगणक को उसी चिन्हित ब्लॉक (Enumeration Block) में भौतिक रूप से उपस्थित होकर ही डेटा फीड करना होगा। ऐप सैटेलाइट इमेज से लोकेशन मैच करेगा।
2. सख्त गोपनीयता (100% Confidential):
जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15 के तहत, बेघर लोगों से लिया गया व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। यह किसी कानूनी जांच के लिए उपयोग नहीं हो सकता।
3. पहचान पत्र की बाध्यता नहीं:
फुटपाथ पर रहने वालों से कोई डॉक्यूमेंट (Aadhaar/PAN) नहीं मांगा जाएगा। वे जो नाम और जानकारी मौखिक रूप से देंगे, वही ऐप में दर्ज होगी।
4. डबल काउंटिंग से बचाव:
प्रगणक को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस बेघर व्यक्ति की गिनती रात में हो रही है, उसका नाम उसके पैतृक गांव या परिवार की लिस्ट में पहले से शामिल न हो।
4. Quick Summary: सामान्य जनगणना बनाम सेंसस नाइट
Census Night: क्या होगा अगर...? (सही नियम)
- 1 मार्च 2027 को सुबह 00:00 बजे (Midnight) के बाद जन्म: गिनती नहीं होगी (क्योंकि वह संदर्भ समय पर दुनिया में नहीं था)।
- 1 मार्च 2027 को सुबह 00:00 बजे (Midnight) के बाद मृत्यु: गिनती होगी (क्योंकि वह संदर्भ समय पर जीवित था)।
- 28 फरवरी 2027 की रात 11:59 PM से पहले मृत्यु: गिनती नहीं होगी (क्योंकि वह संदर्भ समय पर जीवित नहीं था)।
- Train में सफर: रात 12 बजे Train जिस Station या क्षेत्र की सीमा में होगी, वहीं उसकी गिनती की जाएगी।
5. Census Night 2027: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. क्या Census Night के दौरान बेघर लोगों को कोई पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड) दिखाना पड़ता है?
उत्तर: नहीं, बिल्कुल नहीं। फुटपाथ, रेलवे स्टेशन या रैन बसेरों में रहने वाले बेघर लोगों के पास अक्सर दस्तावेज नहीं होते। इसलिए प्रगणक (Enumerator) उनसे कोई आईडी प्रूफ नहीं मांगते। वे मौखिक रूप से जो भी नाम, उम्र और जानकारी देंगे, उसे ही HLO App में दर्ज किया जाएगा।
Q2. अगर कोई व्यक्ति रात में सफर कर रहा है (ट्रेन या बस में), तो उसकी गिनती कैसे होगी?
उत्तर: जो लोग Census Night की रात यात्रा (Transit) कर रहे होते हैं, उनकी गिनती अगले दिन सुबह रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों या टोल प्लाजा पर विशेष काउंटरों के जरिए की जाती है। प्रगणक यह सुनिश्चित करते हैं कि उन्हें उनके मूल गांव या घर पर पहले न गिना गया हो।
Q3. क्या Census Night में जेल के कैदियों और अस्पतालों में भर्ती मरीजों को भी गिना जाता है?
उत्तर: हाँ। जनगणना के नियमों के अनुसार, जेलों में बंद कैदियों, अस्पतालों में लंबे समय से भर्ती मरीजों और सुधार गृहों में रहने वाले लोगों को "Institutional Population" (संस्थागत जनसंख्या) माना जाता है। इनकी गिनती भी इसी विशेष अवधि के दौरान संबंधित संस्थान के प्रमुख या इंचार्ज की मदद से की जाती है।
Q4. क्या Census Night का डेटा पुलिस या किसी कानूनी जांच के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं, यह कानूनी रूप से असंभव है। जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 15 के तहत, सेंसस में जुटाया गया कोई भी व्यक्तिगत डेटा 100% गोपनीय होता है। इस डेटा को पुलिस, कोर्ट, इनकम टैक्स या किसी भी अन्य सरकारी जांच एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जा सकता और न ही इसे अदालत में सबूत माना जा सकता है।
Q5. प्रगणक (Enumerator) को कैसे पता चलेगा कि बेघर व्यक्ति पहले से अपने गांव में नहीं गिना गया है?
उत्तर: प्रगणक डेटा फीड करने से पहले उस व्यक्ति से स्पष्ट रूप से पूछते हैं कि क्या पिछले दिनों में किसी सरकारी कर्मचारी ने उनके पैतृक निवास पर उनके नाम की एंट्री की है। इसके अलावा, डिजिटल जनगणना 2027 के सॉफ्टवेयर में डुप्लिकेशन को रोकने के लिए AI और डेटा मैचिंग टूल्स का उपयोग बैकएंड पर किया जा रहा है।
📊 Source: Census Act 1948, गृह मंत्रालय (MHA) Guidelines, PIB Press Release, RGI Notification, Census of India 2011 Manual
6. निष्कर्ष: नए भारत का डिजिटल ब्लूप्रिंट
सेंसस नाइट के आंकड़े देश की रीढ़ होते हैं। इसी डेटा के आधार पर सरकार तय करती है कि देश के किस शहर में कितने नए रैन बसेरे (Night Shelters), मुफ्त अस्पताल और मुफ्त राशन की दुकानें खोलने की जरूरत है।
28 फरवरी और 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि (00:00 बजे) जो जहां होगा, वहीं उसकी गिनती होगी। Revisional Round 1-5 मार्च तक चलेगा।
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